History Of Hindi Language | हिन्दी भाषा का इतिहास और कालखंड

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History of Hindi:- दोस्तों, आज के इस Article में हम आपको बताने जा रहे हैं, हिंदी के इतिहास के बारे में। जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि पूरे भारतवर्ष में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

आज हम हिंदी के इतिहास पर आधारित यह Article लेकर आए हैं। जिसमें हम आपको हिंदी के बारे में संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।

तो दोस्तों यदि आप भी हिंदी के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारे आज के इस Article History Of Hindi को अंत तक अवश्य पढ़ें। तो चलिए शुरू करते हैं।


History of Hindi | हिन्दी भाषा का इतिहास

दोस्तों विश्व की सबसे पुरानी और सबसे प्राचीनतम संस्कृतियों में से भारतीय संस्कृति भी एक है और हिंदी भाषा भी विश्व की सबसे प्राचीनतम भाषा में से एक है।

आज हम हिंदी भाषा के विकास का संपूर्ण सफर जानेंगे और यह भी जानेंगे, कि यह भाषा किस प्रकार से भारत की राजभाषा बन गई। आइए हम हिंदी भाषा के इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कालखंड की दृष्टि से Hindi भाषा का विभाजन निम्नलिखित रुप से किया जाता है :-

  • वैदिक संस्कृत
  • लौकिक संस्कृत
  • पाली
  • प्राकृत
  • अपभ्रंश तथा अव्ह्त्त
  • हिंदी का आदिकाल
  • हिंदी का मध्यकाल
  • हिंदी का आधुनिक काल

यह बात तो हम सभी को पता होगी, कि हिंदी शब्द की उत्पत्ति सिंध शब्द से हुई है। सिंध शब्द की उत्पत्ति सिंधु शब्द से हुई है। और सिंधु एक नदी का नाम है।

सिंधु नदी के आसपास का क्षेत्र सिंधु क्षेत्र कहलाता है। जब सिंधु शब्द ईरानियों के संपर्क में आया, तो यह शब्द हिंदू या हिंदू हो गया।

इस समय पर ईरानियों द्वारा इसे हिंदू उच्चारित किया जाने लगा। इरानी भाषा में हिंदू शब्द में एक प्रत्यय लगा देने से यह शब्द हिंदिक हो जाता है, जिसका अर्थ होता है ’ हिंदू का ’। यह जानकर आप सभी को हैरानी होगी, कि यूनानी शब्द या फिर अंग्रेजी शब्द indica की उत्पत्ति इसी ईरानी प्रत्यय को लगा कर हुई है।

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हिंदी का इतिहास 1000वी ईसवी से शुरू होता है। 1000वी ईसवी से पहले के हिंदी साहित्य को अपभ्रंश में रखा जाता है और इसे हिंदी की पूर्व पीठिका कहते हैं। आधुनिक भाषाओं का जन्म अपभ्रंश के अलग-अलग रूपों में हुआ है, जो कि कुछ इस प्रकार है :-

अपभ्रंश – आधुनिक भाषाएं

शौरसेनी – पश्चिमी हिंदी, राजस्थानी, पहाड़ी , गुजराती

पैशाची – लहंदा, पंजाबी

ब्राचड – सिंधी

महाराष्ट्री – मराठी

मगधी – बिहारी, बंगला, उड़‍िया, असमिया

पश्चिमी हिंदी – खड़ी बोली या कौरवी, ब्रिज, हरियाणवी, बुन्देल, कन्नौजी

पूर्वी हिंदी – अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी

राजस्थानी – पश्चिमी राजस्थानी (मारवाड़ी) पूर्वी राजस्थानी

पहाड़ी – पश्चिमी पहाड़ी, मध्यवर्ती पहाड़ी (कुमाऊंनी-गढ़वाली)

बिहारी – भोजपुरी, मागधी, मैथिली

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History Of Hindi 

आदिकाल – (1000-1500)

शुरुआती दौर में हिंदी अभप्रश की तरह ही कार्य करती रही। इसका व्याकरण और इसमें सम्मिलित स्वर तथा व्यंजन उतने के उतने ही रहे, किंतु 1100 ईसवी के बाद हिंदी में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले। जिसके बाद 1500 ईसवी तक हिंदी स्वतंत्र रूप से खड़ी हुई।

1460 तक आते-आते देश घर में भाषा का साहित्य सर्जन प्रारंभ हो चुका हो चुका था। और इसी अवधि में दोहा, चौपाई ,छप्पय दोहा, गाथा आदि छंदों में रचनाएं हुई है।

इस समय के प्रमुख रचनाकार है, जिन्हें हम आज भी पढ़ते हैं। यह रचनाकार हैं :- गोरखनाथ, विद्यापति, नरपति नालह, चंदवरदाई, कबीर आदि।


मध्यकाल – (1500-1800 तक)

इस अवधि के बीच हिंदी भाषा में कई बड़े परिवर्तन किए गए। इस अवधि के समय पर देश में मुगलों का राज था और इसी बात का प्रभाव हिंदी भाषा पर भी पड़ा। इसके परिणाम स्वरूप फारसी के लगभग 3500 शब्द, अरबी के 2500 शब्द, पश्तों से 50 शब्द, तुर्की के 125 शब्द हिंदी की शब्दावली में शामिल हो गए।

जैसे-जैसे यूरोप तथा अन्य देशों के साथ भारत का व्यापार बड़ा, वैसे वैसे हिंदी भाषा में कई विदेशी शब्द भी सम्मिलित होते चले गए।

इस अवधि में हिंदी के स्वर्णिम साहित्य की शुरुआत हुई और देशभर में इस आंदोलन ने लोगों के हृदय में हिंदी के प्रति मनोभवाना को जागृत किया।

भक्ति कवि तत्सम शब्दों का प्रयोग करने लगे। इसी अवधि में राम और कृष्ण के जन्म की भाषा यानी कि ब्रजभाषा का भी विकास हुआ। ब्रजभाषा इस काल की मुख्यधारा मानी जाती है।

हिंदी में क, ख, ग, ज, फ, ये पांच नई ध्वनियां, आमतौर पर जिसका इस्तेमाल तथा उच्चारण फारसी पढ़े-लिखे लोग ही किया करते थे, इन्हें हिंदी भाषा की शब्दावली में जगह दी गई।

इस काल के मुख्य कवियों में महाकवि तुलसीदास, संत सूरदास, संत मीराबाई, मलिक मोहम्मद जायसी, बिहारी, भूषण हैं। इसी कालखंड में रचा गया ‘ रामचरितमानस ‘ जैसा ग्रन्थ विश्व में विख्यात हुआ।

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आधुनिक काल (1800 से अब तक )

हिंदी का आधुनिक काल भारत के इतिहास और इसमें हुए परिवर्तनों का साक्षी है। इस समय में अंग्रेजी भाषा का प्रभाव हिंदी भाषा पर पड़ने लगा है।

अंग्रेजी भाषा का प्रचलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रचलन के परिणाम स्वरूप मुगल समय पर प्रचलित भाषाएं जैसे की अरबी फारसी के इस्तेमाल में भारी गिरावट आई है।

1830 में जन्मे मुंशी सदासुख लाल नियाज ने हिंदी खड़ी बोली को प्रयोग में लिया। इस भाषा का मुख्य क्षेत्र देहरादून का मैदानी भाग, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरुत , दिल्ली बिजनौर ,रामपुर ,मुरादाबाद माना जाता है।

19 वी सदी हिंदी भाषा के विकास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इसी समय पर देश में अलग-अलग जगह पर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किए गए, जिसमें प्रचार-प्रसार की मुख्य भाषा हिंदी भाषा थी।

इस समय तक हिंदी भाषा न केवल एक क्षेत्र की भाषा थी, यह भारत देश की भाषा बन चुकी थी। वैसे तो साहित्य की दृष्टि से बांग्ला, मराठी हिन्दी से आगे थीं परन्तु बोलने वालों के लिहाज से हिन्दी सबसे आगे थी।

इसी समय पर हिन्दी को राजभाषा बनाने की पहल गांधी-जी समेत देश के कई अन्य नेता भी कर रहे थे। 1918 में हिंदी साहित्य सम्मलेन की अध्यक्षता करते हुए गांधी जी ने कहा था, की हिंदी ही दश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए।

सन 1900 से लेकर 1950 क हिंदी के अनेक रचनाकारों ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया इनमे से मुख्य लेखक थे :- मुंशी प्रेमचंद ,जयशंकर प्रसाद, माखनलाल चतुर्वेदी , मैथिलीशरण गुप्त, सुभद्राकुमारी चौहान, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पन्त, महादेवी वर्मा आदि।

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निष्कर्ष :-

तो दोस्तों आज का हमारे यह Article यहीं पर समाप्त होता है। आज के इस article में हमने आपको History of Hindi के संदर्भ में सम्पूर्ण जानकारी दी।

उम्मीद करते हैं, कि आपको हमारा आज का यह Article History Of Hindi काफी पसंद आया होगा और इसमें लिखी गई सभी बातें आपको अच्छी तरह से समझ में आ गई होंगी। आज के लिए केवल इतना ही एक बार फिर मुलाकात होगी, आपसे एक नए Article के साथ।

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