कारक किसे कहते हैं, कारक के भेद | Karak Kise Kahate Hain

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Karak Kise Kahate Hain

Karak Kise Kahate Hain :- आज का विषय है ” कारक किसे कहते हैं, इसके कितने भेद हैं “।

कारक हिंदी व्याकरण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके बिना किसी भी वाक्य में स्पष्टता लाना नामुमकिन है। तो आइए हिंदी व्याकरण के इस महत्वपूर्ण प्रश्न – Karak Kise Kahate Hain के बारे में जानकारी लेते हैं।


कारक किसे कहते हैं | Karak Kise Kahate Hain | Karak Ki Paribhasha

Karak Kise Kahate Hain :- क्रिया से संबंध रखने वाले वे सभी शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम के रूप में होते हैं, उन्हें हम कारक कहते हैं। OR संज्ञा सर्वनाम अथवा विशेषण को क्रिया से जोड़ने वाला चिन्ह कारक कहलाता है।

अर्थात सीधे शब्दों में समझा जाए, तो संज्ञा या सर्वनाम शब्दों का जब किसी वाक्य में अलग-अलग रूप से प्रयोग होता है, तब उन्हें अलग-अलग रूपों को कारक कहते हैं।

उदाहरण के लिए:-

  1. सीता किताब पड़ती है।
  2. माँ खाना बनाती है।
  3. नरेश स्कूल जाता है।
  4. वह रोज सुबह गंगा किनारे जाता है।
  5. राजू सफाई करता है।
  6. रोहन ने पत्र लिखा।
  7. राम ने रावण को बाण मारा।
  8. पंडित ने मंदिर में पूजा की।
  9. वह रोज कविता को भूगोल पढ़ाता है।
  10. सीता मीरा के लिए चूड़ियां लाई है।

Karak Ke Bhed | कारक के भेद :

कारक के भेद:- आपने अभी कारक की परिभाषा ( Karak Kise Kahate Hain ) और उसके उदाहरण पढ़े, आइये अब आपको कारक के भेदों के बारे में बताते हैं।

कारक के कुल आठ भेद होते हैं:-

  1. कर्ता कारक
  2. कर्म कारक
  3. करण कारक
  4. संप्रदान कारक
  5. अपादान कारक
  6. संबंध कारक
  7. अधिकरण कारक
  8. संबोधन कारक

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1. कर्ता कारक:- जो वाक्य में कार्य को करता है और कर्ता कहलाता है। कर्ता वाक्य का वह रूप होता है, जिससे कार्य को करने वाले का पता चलता है। कर्ता कारक का विभक्ति चिन्ह ” ने ” होता है।

अब आपको कर्ता कारक के कुछ उदाहरणों से अवगत कराते हैं:-

  1. विकास में क्रिकेट खेली।
  2. रानी ने पूरी किताब पढ़ ली।
  3. दिनेश ने पीड़ितों की सहायता की।
  4. राम पुस्तक पढ़ता है।
  5. अध्यापक ने विद्यार्थियों को पढ़ाया।

2. कर्म कारक:- वाक्य में की गई क्रिया का प्रभाव जिस व्यक्ति या वस्तु पर पड़ता है, वह कर्म कारक कहलाता है। कर्म कारक का विभक्ति चिन्ह ” को ” होता है।

यह कुछ उदाहरणों के द्वारा स्पष्ट हो जाएगा, जैसे कि:-

  1. मीरा ने सोनू को बुलाया।
  2. मां ने बच्चे को खाना खिलाया।
  3. माली ने बच्चों को तलवार से भगाया।
  4. महावीर ने हाथी को पानी पिलाया।
  5. अध्यापक ने विद्यार्थी को स्कूल  बुलाया।

3. करण कारक:- जिसकी सहायता से किसी काम को अंजाम दिया जाता है, वह करण कारक कहलाता है। अर्थात वह साधन जिससे क्रिया होती है, उसे करण कारक कहते हैं। करण कारक के दो विभक्ति चिन्ह होते हैं ” से ” और ” के द्वारा “।

उदाहरण के लिए नीचे पढ़ें:-

  1. बच्चे खिलौनों से खेल रहे हैं।
  2. अमित सारी जानकारी पुस्तकों से लेता है।
  3. गीता ठंड से कांप रही थी।
  4. सुनील ने रानी से सारा खाना बनवाया।
  5. पत्र को कलम से लिखा गया है।

4. संप्रदान कारक:- जब वाक्य में किसी को कुछ दिया जाए या किसी के लिए कुछ किया जाए, तो वहां पर संप्रदान कारक होता है, क्योंकि संप्रदान का अर्थ – ” देना ” होता है। संप्रदान कारक की विभक्ति चिन्ह ” के लिए ” है।

उदाहरण निम्नलिखित है:-

  1. राम मेरे लिए कोई उपहार लाया।
  2. नरेश मीणा के लिए फूल लाया।
  3. विकास सुमन को किताबें देता है।
  4. भूखे के लिए रोटी लाओ।
  5. मां अपने बच्चे के लिए दूध लेकर आई।

5. अपादान कारक:- जब संज्ञा या सर्वनाम की किसी रूप से किन्ही 2 वस्तुओं के अलग होने का बोध होता है, उसे हम अपादान कारक कहते हैं। अपादान कारक विभक्ति चिन्ह भी ” से ” होता है, जो चिन्ह करण कारक का होता है, लेकिन वहां इसका मतलब साधन से होता है। अपादान कारक में ” से ” का मतलब किसी चीज से अलग होना – दिखाने के लिए प्रयुक्त होता है।

उदाहरण के लिए:-

  1. सांप बिल से बाहर निकला।
  2. अमित बाजार से आ गया।
  3. आसमान से बिजली गिरी।
  4. पेड़ से आम नीचे गिर गया।
  5. पृथ्वी सूर्य से बहुत दूर है।

6. संबंध कारक:- जैसा कि हमें कार्य के नाम से ही पता चल रहा है, कि यह वस्तुओं में संबंध बताता है। अर्थात सरल शब्दों में कहें, तो संज्ञा या सर्वनाम के किन्हीं दो वस्तुओं के बीच का संबंध बोध कराता हो, उसे हम संबंध कारक कहते हैं। संबंध कारक की विभक्ति चिन्ह निम्न हैं :- का, के, की, ना, ने, नी, रा, रे, री।

संबंध कारक के उदाहरण इस प्रकार से हैं:-

  1. वह शाम का पुत्र है।
  2. वह हरीश की किताब है।
  3. राम सीता का भाई है।
  4. गोरी नरेश की गाय है।
  5. बच्चे की मां रो रही है।

7. अधिकरण कारक:-  संज्ञा का वह रूप जिसमें क्रिया के आधार का बोध होता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। अधिकरण का अर्थ ” आश्रय ” होता है।  विभक्ति चिन्ह ” और ” होता है।

अधिकरण कारक उदाहरण इस प्रकार है:-

  1. पुस्तक मेज पर है।
  2. महल में दीपक जल रहा है।
  3. वह कुर्सी आंगन में डाल दो।
  4. फ्रिज में सेव रखा है।
  5. उस कमरे में दादा जी रहते हैं।

8. संबोधन कारक:- जिस वाक्य से हमें किसी को सचेत करने अथवा बुलाने का भाव प्रकट होता है, उसे हम संबोधन कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिन्ह – अरे, हे, अजी होता है।

उदाहरण के लिए हम नीचे पढ़ेंगे:-

  1. हे ईश्वर! मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ।
  2. अरे! तुम इतनी जल्दी कैसे आ गए।
  3. अरे श्याम! बहुत बुरा हुआ।
  4. अरे! यह इतना बड़ा हो गया।
  5. अरे भाई! तुम तो बहुत दिनों बाद आए।

ऊपर हमने आपको कारक किसे कहते हैं ( Karak Kise Kahate Hain ) और कारक के भेद ( Karak Ke Bhed ) के बारे में बताया।


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निष्कर्ष:

इस आर्टिकल को लिखने का हमारा यही उद्देश्य है, कि आपको हिंदी व्याकरण के विषय – Karak Kise Kahate Hain पर सारी जानकारी मिल सके।

यह आर्टिकल ( Karak Kise Kahate Hain ) विभिन्न परीक्षा की दृष्टि से भी बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। आपको हमारा ये लेख कैसा लगा – कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताएं और ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच शेयर करे।

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