लिपि किसे कहते है | Lipi Kise Kahate Hain

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Lipi Kise Kahate Hain

Lipi Kise Kahate Hain : किसी भी भाषा में लिपि का सबसे ज्यादा महत्व होता है। जो भाषा हम बोलते हैं, हमें उसे लिखना भी आना चाहिए।

बोलचाल में प्रयोग की जाने वाली भाषा को लिखा जाना लिपि के माध्यम से ही संभव हो पाता है। अतः किसी भी भाषा को लिखने के ढंग को लिपि कहते हैं।

लिपि को कई बार लेखन प्रणाली के रूप में भी जाना जाता है।  किसी भी भाषा को बोलने के लिए अनेकों प्रकार की ध्वनियों का इस्तेमाल भी किया जाता है। इन ध्वनियों को भी हम लिपि के माध्यम से अभिव्यक्त कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं की लिपि किसे कहते हैं।


लिपि किसे कहते हैं ( Lipi Kise Kahate Hain ) यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। अमूमन परीक्षाओं में यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए यह प्रश्न परीक्षा के दृष्टिकोण से भी काफी अहम है।

आज के इस आर्टिकल में हम आपको लिपि के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। सभी स्तर के विद्यार्थी इस आर्टिकल की सहायता से लिपि को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।

यदि आप विद्यालय, विश्वविद्यालय या फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र हैं और लिपि के बारे में समझना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आगे पढ़ना जारी रखें।


लिपि किसे कहते हैं ? | Lipi Kise Kahate Hain | Lipi ki Paribhasha

Lipi Kise Kahate Hain : किसी भी भाषा की लिखावट या लिखने के ढंग को ही लिपि कहते हैं।

सरल शब्दों में समझे तो, हर भाषा को बोलने के लिए हमें ध्वनि की जरूरत पड़ती है और इन्हीं ध्वनि को चिह्न के माध्यम से अभिव्यक्त करना ही लिपि कहलाता है। जैसे कि :-

  • हिंदी भाषा – देवनागरी लिपि
  • संस्कृत – देवनागरी
  • नेपाली – देवनागरी
  • मराठी – देवनागरी
  • पंजाबी – गुरमुखी
  • फ्रेंच , स्पेनिश , अंग्रेजी – रोमन
  • अरबी , उर्दू – फारसी

पूरे विश्व भर में हजारों भाषाएं बोली जाती हैं और सभी की अपनी-अपनी लिपि है। यहां तक की कई सारी भाषाओं की लिपि की खोज पर अभी भी शोध चल रहा है।


यदि आप हिंदी व्याकरण में वाक्य किसे कहते हैं, विलोम शब्द, वचन, बोली, उपसर्ग, अलंकार, संज्ञा, वर्णमाला, इत्यादि के बारे में पढ़ना चाहते हैं, तो यहां पर पढ़ सकते हैं।


लिपि के प्रकार | Lipi Ke Prakar Or Lipi Ke Bhed 

  1. चित्र लिपियां
  2. अल्फाबेटिक लिपियां
  3. अल्फासिलेबिक लीपियां

चित्र लिपियां:

इस प्रकार की लिपि का इस्तेमाल चीन कोरिया तथा जापान में किया जाता है। इस प्रकार की लिपि में चित्रों के द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति की जाती है।

  • ब्राह्मी लिपियां: इस लिपि का सबसे ज्यादा महत्व है, क्योंकि इस लिपि से ही देवनागरी , संस्कृत तथा दक्षिण एशिया एवं दक्षिण पूर्व एशिया की लिपियां विकसित हुई है।
  • फोनेशियन लिपियां: यह यूरोप , मध्य एशिया , और उत्तरी अफ्रीका आदि देशों में प्रयोग की जाती है।

अल्फाबेटिक लिपियां:

इस प्रकार की लिपि में स्वर पूरे अक्षर का रूप लिए व्यंजन के बाद आते हैं।

  • लैटिन लिपि अर्थात रोमन लिपि: अंग्रेजी, फ्रांसीसी, जर्मन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और पश्चिम तथा मध्य यूरोप की सभी भाषाएं इस ही लिपि के अंतर्गत आती हैं।
  • यूनानी लिपि: यूनानी भाषा या गणित चिन्ह इसी लिपि में लिखे जाते हैं।
  • अरबी लिपि: अरबी, उर्दू, फारसी तथा कश्मीरी इस लिपि में लिखे जाते हैं।
  • इब्रानी लिपि: इब्रानी भाषा इस लिपि में लिखी जाती है।
  • सीरिलिक लिपि: सोवियत संघ की अधिकतर भाषाएं इस लिपि में लिखी जाती हैं।

अल्फासिलेबिक लीपियां

इस प्रकार की लिपि में एक या अधिक व्यंजन होते हैं और उसमें स्वर की मात्रा का चिन्ह लगाया जाता है। व्यंजन के अनुपस्थित होने पर स्वर का पूरा अक्षर या चिन्ह लिखा जाता है। अल्फासिलेबिक लीपि के उदाहरण हैं :-

  • देवनागरी लिपि: हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली तथा उर्दू की नस्तलीक लिपि देवनागरी में लिखी जाती हैं।
  • ब्राह्मी लिपि: प्राचीन काल की संस्कृत तथा पाली भाषा किस लिपि में लिखी जाती थी।
  • गुरुमुखी लिपि: पंजाबी भाषा की लिपि में लिखी जाती है।
  • तमिल लिपि: तमिल भाषा इस लिपि में लिखी जाती है।  
  • गुजराती लिपि: गुजराती भाषा गुजराती लिपि में लिखी जाती है।
  • बंगाली लिपि: बंगाली भाषा बंग्ला लिपि में लिखी जाती हैं।


कुछ महत्वपूर्ण लिपि का इतिहास

देवनागरी लिपि का इतिहास:

इसका इतिहास 1000 से 1200 के बीच का माना जाता है। काशी में इस लिपि का विकास हुआ जिसे प्राचीन काल में देवनगर नाम से जाना जाता था। इसलिए इसे देवनागरी लिपि नाम से जाना जाता है।

भारत में लगभग सभी भाषाओं का आरंभ ब्राह्मी लिपि से माना जाता है। इतिहासकार कहते हैं, कि ब्राह्मी लिपि आदि काल से है। प्रमाणित रुप से ब्राह्मी लिपि का प्रयोग वैदिक काल में आर्य द्वारा किया जाता था। बौद्ध काल के समय में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग इसके चरम पर था।

देवनागरी लिपि को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इसमें जैसा लिखा जाता है, वैसा ही बोला जाता है। यह समझने में भी काफी आसान होती है, क्योंकि जैसा वर्ण होता है, वैसे ही उसकी ध्वनि भी होती है।

भारत में लिपि का इतिहास काफी प्राचीन माना गया है। भारतीय वेद पुराण और धर्म शास्त्र किसी ना किसी लिपि में लिखे गए हैं। और तो और रामायण और महाभारत भी देवताओं द्वारा लिखे गए हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा, कि भारत में लिपि का ज्ञान सबसे प्राचीनतम है।

चित्र लिपियां का इतिहास:

संसार में चित्र लिपियों का इतिहास सबसे ज्यादा पुराना है। आदिमानव अपने विचारों को चित्र तथा आकृति के माध्यम से शिला पर लिखा करते थे। इसका एक बड़ा उदाहरण भीम बेटका, प्राचीन गुफा आदी में देखने को मिलता है।

इतना ही नही बल्कि आज भी जापान, चीन, दक्षिण कोरिया तथा मिस्त्र की लिपियों को देखे वह तो वह चित्र और आकृति पर आधारित होती हैं। ऐसा माना जाता है, की इन भाषाओं का विकास चित्र लिपि से ही हुआ है।

ब्रेल लिपि का इतिहास:

यह लिपि मुख्य रूप से नेत्रहीन लोगों के लिए होती है। ब्रेल लिपि द्वारा दृष्टि बाधित लोगों को पढ़ने में आसानी होती है। यह लिपि छह बिंदुओं पर आधारित होती है।

दृष्टिहीन लोग अपनी उंगलियों के सहारे उभरे हुए बिंदुओं को महसूस करते हैं और उसे समझते हैं। यह अन्य भाषाओं की भांति नहीं होती। यह अंग्रेजी या हिंदी भाषा नहीं होती बल्कि सभी भाषाओं का समग्र रूप होती है। यह लिपि उंगली के स्पर्श से पढ़ी जाती है।

इसकी खोज लुइस ब्रेल नामक व्यक्ति ने की थी। काफी समय तक इस लिपि का इस्तेमाल सेना द्वारा भी किया जाता था। यह लिपि अंधेरे में भी कारगर होती है।

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अन्तिम शब्द:

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल – Lipi Kise Kahate Hain में हमने आपको लिपि के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उम्मीद करते हैं, कि अब आपको अच्छी तरह से समझ में आ गया होगा की लिपि किसे कहते हैं, ( Lipi Kise Kahate Hain) और लिपि कितने प्रकार की होती हैं।

अब आपके मन में लिपि से संबंधित सभी प्रश्न हल हो गए होंगे। उम्मीद करते हैं, आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया होगा।

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