वर्णमाला किसे कहते है – Varnmala kise kahate hain

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Varnmala Kise Kahate Hain

वर्णमाला किसे कहते है – Varnmala kise kahate hain

दोस्तों अगर आप हिंदी व्याकरण अच्छे से समझ जाते हैं, तो हिंदी आपके लिए हिंदी बेहद आसान विषयों में से एक हो जाएगा | इसीलिए आज हम इस लेख के द्वारा आपको हिंदी व्याकरण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करेंगे जैसे, कि Varnmala kise kahate hain, Varn kise kahate hain, Swar kise kahate hain इत्यादि इसके अलावा वर्ण-माला के कितने प्रकार है, उदाहरण सहित हम यहां आपको बताने वाले हैं | तो आइए जानते हैं, Varnmala kise kahate hain.


वर्ण किसे कहते हैं – Varn Kise Kahate Hain

वर्ण हिंदी भाषा की सबसे छोटी इकाई को कहते हैं | देवनागरी लिपि के अनुसार लिखित इकाई संकेतों को वर्ण कहा जाता है | वर्ण उस मूल इकाई को कहा जाता है, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं, जैसे कि क, ख, आ, अ, ई, इ, ग आदी।

उदाहरणस्वरुप :- शाम ने सेव खाया। यदि इस वाक्य को हम तोड़कर छोटे-छोटे खंडों में लिखते हैं, तो यह कुछ इस प्रकार होगा शाम + ने + सेब + खाया।

लेकिन जब हम इन छोटे-छोटे खंडों में टूटे हुए वाक्य को और भी छोटा करके लिखते हैं, जैसे कि,

शाम = श + आ + म

ने = न + ए

सेब = स + ए +ब

खाया = ख + आ +य + आ

यह टूटे हुए शब्द ही मूल इकाइयां हैं, जिन्हें और आगे तोड़कर नहीं लिखा जा सकता। इन्हीं खंड मूल इकाइयों को वर्ण कहा जाता है। बता दूं, कि हिंदी भाषा 1 देवनागरी लिपि में लिखी जाती है |

सभी भाषाओं में अलग-अलग वर्ण होते हैं। उसी प्रकार  हिंदी भाषा में कुल 52 वर्ण होते हैं।



वर्णमाला किसे कहते है ? – Varnmala Kise Kahate Hain

भाषा चाहे जो भी हो लेकिन सभी वर्णों को जब एक समूह में व्यवस्थित रूप से लिखा जाता है, तो उसे वर्णमाला कहते हैं |

सभी भाषा के अपने अलग-अलग वर्णमाला होते हैं, जैसे कि हिंदी भाषा की वर्णमाला कुछ इस तरह है, अ, आ, क, ख, ग, घ, ड़…… तथा अंग्रेजी भाषा की वर्णमाला कुछ इस तरह होती है, जैसे की, A, B, C, D, E, F, G, H….

वर्णमाला के प्रकार – Varnmala kitne hote hain

ऊपर हमने आपको वर्णमाला किसे कहते हैं – Varnmala Kise Kahate Hain के बारे में बताया | अब हम वर्णमाला के प्रकार के बारे में बात करते हैं, जिस तरह अंग्रेजी भाषा में दो तरह के वर्ण होते हैं, ठीक उसी प्रकार हिंदी भाषा की वर्णमाला में भी दो प्रकार के वर्ण होते हैं, जैसे कि :-

1. स्वर (Vowel)

2. व्यंजन (Consonant)


स्वर किसे कहते हैं – Swar Kise Kahate Hain

स्वर उसे कहा जाता है, जिनके उच्चारण करने में किसी दूसरे वर्ण की आवश्यकता नहीं होती | स्वर्ण वर्ण के उच्चारण के लिए कंठ तथा तालु का इस्तेमाल किया जाता है, ना की होंठ व जीभ का | जैसे कि अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ इत्यादि।

हालांकि वर्ण-माला में अं और अ: को भी साथ में लिखा जाता है, लेकिन वास्तव में अं को अनुस्वार और अ: को विसर्ग कहा जाता है।

यानी की अं और अ: स्वर वर्ण नही होते है। हिंदी वर्ण-माला में कुल 11 स्वर होते हैं, जिनमें से अं और अ: ना तो स्वर वर्ण के अंतर्गत आते हैं और ना ही व्यंजन वर्ण के।

स्वर वर्ण के प्रकार

स्वर वर्ण के दो प्रकार के होते हैं:- 

1. मुल स्वर 

2. संयुक्त स्वर

1 . मुल स्वर

मूल स्वर के अंतर्गत कुछ इस तरह के अक्षर आते हैं जैसे कि अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऐ, ओ

2 . संयुक्त स्वर

संयुक्त स्वर के अंतर्गत  अक्षरों को तोड़कर व बिल्कुल छोटी और सरल शब्दों में लिखा जाता है जैसे कि ऐ (अ + ए) और औ (अ + ओ)


व्यंजन किसे कहते हैं – Vyanjan Kise Kahate Hain

जिन वर्णों का उच्चारण करने के लिए स्वर की जरूरत पड़ती है, उन्हें व्यंजन कहा जाता है | हिंदी भाषा के वर्ण-माला में कुल 33 व्यंजन होते हैं, जैसे कि क, ख, ग, घ, ड़, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य्, र्, ल्, व् इत्यादि।

व्यंजन के प्रकार – Vyanjan Kitne Hote Hain

व्यंजन मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं| जैसे कि:-

1. स्पर्श व्यंजन

2 . अन्त: स्थ व्यंजन

3 . उष्म व्यंजन

1 . स्पर्श व्यंजन

स्पर्श व्यंजन – जैसा कि नाम से ही समझ आ रहा है, जिसका अर्थ होता है, छूना यानी स्पर्श करना | जिन व्यंजनों को बोलते समय जीव मुंह के किसी भी भाग को यानी कि होंठ, दाँत, तालु, कंठ इत्यादि को स्पर्श करती है, तो उन्हें स्पर्श व्यंजन कहा जाता है | स्पर्श व्यंजन मुख्यता 25 होते हैं।

2 . अन्त: स्थ व्यंजन

इसका अर्थ होता है, भीतर यानी कि अंदर | कुछ व्यंजनों का उच्चारण करते समय जब वह भीतर ही रहे, यानी मुंह के अंदर ही रहे, तो उसे अन्त: स्थ व्यंजन कहा जाता है |

यह व्यंजन मुख्यता चार होते हैं, जैसे कि य, र, ल, व। इन व्यंजनों का उच्चारण कंठ, तालु, जीव और होंठ के परस्पर स्नेह के वजह से होता है | ध्यान देने वाली बात यह है, कि इन व्यंजनों का उच्चारण करते समय यह पूर्ण रूप से उस पर नहीं होता है, इन व्यंजनों को अर्ध स्वर भी कहा जाता है।

3 . उष्म व्यंजन

उष्म का अर्थ होता है, गर्म यानी कि इसका मतलब यह हुआ कि इन व्यंजनों को बोलते समय हवा मुंह के विभिन्न भागों से टकराती है और क्लास में गर्मी पैदा कर देती है |

इन व्यंजनों को उष्म व्यंजन कहा जाता है, इन व्यंजनों को बोलते समय मुंह से गर्म हवा भी निकलती है, जो मुंह में रगड़ या घर्षण के कारण उत्पन्न होती है | यह व्यंजन मुख्यता 4 तरह के होते हैं, जैसे की:-

1 ) कंठ्य यानी गले से – क, ख, ग, घ, ड़

2)  ताल्व्य यानी कठोर तालू से – च, छ, ज, झ, ञ, य, श

3) मूर्धन्य यानी कठोर तालू के अगले भाग से – ट, ठ, ड,

4 ) दंत्य यानी दाँतो से- ढ, ण, ष

5 ) व्त्सर्य यानी दाँतो के मुल से – त, थ, द, ध, न

6) ओष्ठय यानी दोनो होंठो से- स, ज, र, ल

7 ) दंतौष्ठय यानी निचले होंठ और उपर के दांतो से – प,फ, ब, भ, म

8) स्वर यन्त्र से- ह।


अन्तिम शब्द:-

दोस्तों मुझे उम्मीद है, कि आज का यह लेख वर्णमाला किसे कहते हैं – Varnmala Kise Kahate Hain, आपके लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित हुआ होगा।

लेकिन फिर भी यदि आपको इससे संबंधित कोई और सवाल पूछने हैं, तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं | इसके अलावा इस लेख Varnmala Kise Kahate Hain को सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को इसकी जानकारी प्राप्त हो सके।


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